प्रकृति कविता

बारिश की शाम

जब बादल दिल की बातें करते हैं,
भीगी राहों पर सपने चलते हैं।
खिड़की से झाँकती एक याद पुरानी,
चुपके से मन में दीपक धरते हैं।

हर बूंद में कोई धुन जागती है,
मिट्टी अपनी खुशबू लिखती है।
बारिश की शाम यूँ आती है जैसे,
थकी हुई आत्मा फिर से हँसती है।

लेखक के बारे में

आरव शर्माजयपुर

नई पीढ़ी के कवि, जिनकी रचनाओं में प्रकृति और प्रेम सहजता से मिलते हैं।

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