बारिश की शाम
जब बादल दिल की बातें करते हैं,
भीगी राहों पर सपने चलते हैं।
खिड़की से झाँकती एक याद पुरानी,
चुपके से मन में दीपक धरते हैं।
हर बूंद में कोई धुन जागती है,
मिट्टी अपनी खुशबू लिखती है।
बारिश की शाम यूँ आती है जैसे,
थकी हुई आत्मा फिर से हँसती है।
भीगी राहों पर सपने चलते हैं।
खिड़की से झाँकती एक याद पुरानी,
चुपके से मन में दीपक धरते हैं।
हर बूंद में कोई धुन जागती है,
मिट्टी अपनी खुशबू लिखती है।
बारिश की शाम यूँ आती है जैसे,
थकी हुई आत्मा फिर से हँसती है।