हिंदी ग़ज़ल संग्रह
चुनिंदा ग़ज़लें, भावार्थ और संबंधित रचनाएँ।
चलते रहना
By कबीर वर्मा
रात अगर लंबी हो जाए,
दीपक बनकर जलते रहना।
रास्ते चाहे रूठ भी जाएँ,
पाँव भरोसे चलते रहना।
हार नहीं अंतिम सच है,
सपनों में भी शक्ति रहे।
मन के भीतर सूरज रखो,
अँधियारा फिर टिक न सके।
भावार्थ: यह रचना स्मृति, प्रेम और जीवन के अनुभवों को सरल भाषा में व्यक्त करती है।
पूरी रचना पढ़ेंतिरंगे की शपथ
By कबीर वर्मा
मिट्टी की सौंधी महक में,
वीरों की आवाज़ सुनाई देती है।
तिरंगे की हर लहर में,
भारत माँ मुस्काती रहती है।
चलो निभाएँ यह वचन,
मान रहे हर जन का मान।
देश रहे सबसे ऊपर,
यही हमारा सच्चा गान।
भावार्थ: यह रचना स्मृति, प्रेम और जीवन के अनुभवों को सरल भाषा में व्यक्त करती है।
पूरी रचना पढ़ेंबारिश की शाम
By आरव शर्मा
जब बादल दिल की बातें करते हैं,
भीगी राहों पर सपने चलते हैं।
खिड़की से झाँकती एक याद पुरानी,
चुपके से मन में दीपक धरते हैं।
हर बूंद में कोई धुन जागती है,
मिट्टी अपनी खुशबू लिखती है।
बारिश की शाम यूँ आती है जैसे,
थकी हुई आत्मा फिर से हँसती है।
भावार्थ: यह रचना स्मृति, प्रेम और जीवन के अनुभवों को सरल भाषा में व्यक्त करती है।
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