दीप भीतर का
मंदिर बाहर ढूँढ रहे हो,
मन का कोना देखो तो।
जिस ईश्वर को पुकार रहे हो,
अपनी करुणा लेखो तो।
भक्ति कोई शोर नहीं है,
एक सहज-सी शांति है।
जिसके भीतर प्रेम जगे,
वहीं सच्ची आरती है।
मन का कोना देखो तो।
जिस ईश्वर को पुकार रहे हो,
अपनी करुणा लेखो तो।
भक्ति कोई शोर नहीं है,
एक सहज-सी शांति है।
जिसके भीतर प्रेम जगे,
वहीं सच्ची आरती है।