तुम्हारी याद
तुम्हारी याद की धीमी खुशबू,
अब भी कमरे में रहती है।
मैं जितना उसे भुलाना चाहूँ,
वह उतना मन में बहती है।
कुछ रिश्ते लिखे नहीं जाते,
बस धड़कन में बस जाते हैं।
दूरी चाहे जितनी भी हो,
अपने कहाँ बदल जाते हैं।
अब भी कमरे में रहती है।
मैं जितना उसे भुलाना चाहूँ,
वह उतना मन में बहती है।
कुछ रिश्ते लिखे नहीं जाते,
बस धड़कन में बस जाते हैं।
दूरी चाहे जितनी भी हो,
अपने कहाँ बदल जाते हैं।